आधी पहचान
सब बहुत खुश थे, खूब जश्न मनाया मेरे होने का
सबको ना जाने कब से था इंतज़ार मेरे ही आगमन का
दुनिया में आयी मैं एक आशीर्वाद बन कर
किया सब पर उपकार उनको मुस्कान दे कर
देखते ही देखते सब बदलने लगा
किताबों में कही ना पाया व्याख्यान अंतर्मन के सवालों का
बहुत प्रयास किया अपने बारे में जानने का
जिज्ञासा थी पता करने की कि मैं हूँ कौन, क्यूँ बन रही हूँ मैं ऐसी
ऐसा परिवर्तन अन्य में क्यूँ नहीं दिख रहा
ना मैं लड़की सी ना मैं लड़का सा बस एक भिन्न सा एक मासूम चेहरा
सब सखी साथियों ने भी कर दिया अलग और लगा दिया एक पहरा
पता ही नहीं चला कब मेरा सौदा हुआ और मेरे जैसे लोग दिखने लगे
पूछा तो बताया गया की नहीं हूँ मैं इस समाज का हिस्सा
ऐसा भी कैसा इंसान, आधा औरत और आधा मर्द हो जिसका जिस्म
अभिशाप होती हैं समाज में जहां पैदा होती है ऐसी क़िस्म
सबको देखती थी कुछ समय तक सबका क़िस्सा अलग अलग लेकिन मक़सद एक ही
बस आज का दिन ढाल जाए और गुहार अगले जन्म की
सवाल बहुत आते हैं मन में की जो अन्य करते हैं, मैं भी सक्षम हूँ हर उन शैली में
तो फिर मेरा ही सौदा क्यूँ हुआ ऐसे खुले बाज़ारों में
क्यूँ नहीं दिया मुझे सामान्य जीवन जीने का अधिकार
इंसान तो तुम भी हो, ईश्वर ने तो नहीं किया था ऐसा प्रतिकार
क्यूँ कमाया ऐसा कर्म तुमने, डरती हूँ कही ईश्वर भी ना कर दे तुम्हारा बहिष्कार
शायद कलम ही खप जाए जो लिख दिया चिट्ठा पूरा
दुआ माँगती हूँ की फिर ना हो इंसान ऐसा अधूरा
हे रचनाकार, तू ऐसा रचना कर की अलग ही बना ग्रह हमारा
या इस समाज को समझा की इस ग्रह से ना छीने कोई अधिकार हमारा
~poetessworld62

Wooww... so nice and heart touching.. keep writing...
ReplyDeleteThank you 🙏
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