आधी पहचान
सब बहुत खुश थे , खूब जश्न मनाया मेरे होने का सबको ना जाने कब से था इंतज़ार मेरे ही आगमन का दुनिया में आयी मैं एक आशीर्वाद बन कर किया सब पर उपकार उनको मुस्कान दे कर देखते ही देखते सब बदलने लगा किताबों में कही ना पाया व्याख्यान अंतर्मन के सवालों का बहुत प्रयास किया अपने बारे में जानने का जिज्ञासा थी पता करने की कि मैं हूँ कौन , क्यूँ बन रही हूँ मैं ऐसी ऐसा परिवर्तन अन्य में क्यूँ नहीं दिख रहा ना मैं ...