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Showing posts from March, 2022

आधी पहचान

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  सब   बहुत   खुश   थे ,  खूब   जश्न   मनाया   मेरे   होने   का   सबको   ना   जाने   कब   से   था   इंतज़ार   मेरे   ही   आगमन   का   दुनिया   में   आयी   मैं   एक   आशीर्वाद   बन   कर   किया   सब   पर   उपकार   उनको   मुस्कान   दे   कर   देखते   ही   देखते   सब   बदलने   लगा   किताबों   में   कही   ना   पाया   व्याख्यान   अंतर्मन   के   सवालों   का   बहुत   प्रयास   किया   अपने   बारे   में   जानने   का   जिज्ञासा   थी   पता   करने   की   कि   मैं   हूँ   कौन ,  क्यूँ   बन   रही   हूँ   मैं   ऐसी   ऐसा   परिवर्तन   अन्य   में   क्यूँ   नहीं   दिख   रहा   ना   मैं ...

सपनों का मकान

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खुद से दूर भागती हूँ जब सच्चाई का प्रतिबिम्ब आँखों  में होता है  मैं अक्सर सपनों  का मकान बनाती  हूँ  जो सच्चाई से मीलों दूर होता है कब तक भागूँ आख़िर थक जाऊँगी  अंतर्मन सब जानता है की में एक दिन हार जाऊँगी परंतु आस है उस किरण की जो एक दीप जलाएगी और कहेगी, हो गया है सवेरा अब अपने जीवन का तू खुद दर्पण बन  तेरी रूह का विश्लेषण है ये अब तेरा मन  देख अपनी वास्तविकता जो है तेरे सपनों के मकान जैसा  सुन ली गई है तेरी हर वो अर्ज़ जो गोदी थी तूने उस मकान के दीवारों में  यह तेरा रास्ता है, मंज़िल सामने है और यह दर्पण है,  कर प्रतिबिम्ब अपनी वास्तविकता का  बना मनोबल इतना की फिर ना करे तू यात्रा ना भूत में ना भविष्य में, तेरी सच्चाई ही तेरा वर्तमान है, खुल के जी ले अब इसमें .. फिर थामूँगी में हाथ अपनी ज़िंदगी का ओर चलूँगी खुद के साथ मिला कर चार कदम  ना होगा परेशान चित्त ना होगा अशांत मन  बस जीवन से प्रेम होगा और भरोसा उस स्वप्न पर  ~poetessworld62  ♥️

बिन तेरे कैसी होली

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बिन   तेरे   कैसी   होली   रंगना   था   जिसके   रंग   से   उसकी   यादों   में   रंगी   हूँ   सबके   साथ   हंस   ज़रूर   लेती   हूँ   जब   रूह   में   तुझे   महसूस   कर   लेती   हूँ   रंग   पंचमी   सबके   लिए   आज   आयी   है   मेरे   लिए   तो   रंग   तेरी   सुध   का   लायी   है   दूर   बैठी   देती   हूँ   आलिंगन   तुझको   होली   का   त्योहार   मुबारक   हो   मुझको   ~poetessworld62 

सर्वव्यापी प्रभु

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मन   में   आया   की   कुछ   लिखूँ   तेरे   लिए ,  परंतु   क्या   लिखूँ   जब   तू   ही   मेरा   रचियता   है ,  तू   ही   सर्वज्ञ   है   तू   सर्वव्यापी   है ,  तू   ही   सर्वत्र   है ,  हे   मेरे   प्रभु   मैं   तो   एक   धूल   का   कण   हूँ   जो   शायद     तेरे   हल्के   से   एक   तेज   को   भी   सम्भाल   ना   पाऊँ   भले   ही   सम्भाल   ना   पाऊँ   लेकिन   समझ   मैं   जाती   हूँ   तेरी   हर   चाल   हर   चाल   उस   हाल   में   ना   समझ   पाऊँ   लेकिन   देर   सवेर   लगने   लगता   है   कि   तू   ही   था   तू   ही   है   तू   ही   है     जिसको   हर ...

प्रेम का धन

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इतनी   धनी   तो   मैं   नहीं   की   कोई   सबसे   मूल्यवान   वस्तु   माँगे   और   मैं   दे   सकूँ   परंतु   हाँ ,  इतनी   धनी   मैं   अवश्य   हो   जाऊँ   कि   करना   पड़े   भाव   कम   उस   मूल्यवान   वस्तु   का   तो   नाम   तेरा   ले   सकूँ   किसी   को   चाहने   की   पराकाष्ठा   अगर   हो   तो   हमेशा   तू   ही   चिंतन   में   रहे   इतनी   सहज   तो   मैं   नहीं   कि   वरण   तेरा   विस्मरण   रहे   कोई   पूछे   मुझसे   अगर   दिन   भर     का   सबसे   सुंदर   पल   मेरा . तो   जब   भी   होंठों   को   छू   जाए   नाम ,  आँखो   में   उतरे   छवि   एवं   पलकों     को ...

way to my Love

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It becomes too tough sometimes to see your way to me. Too much glitz in heart, to have you back. I just started believing in the love quote: "If love comes back to you, it's yours; and if it doesn't, it never was." That leftover fondness, long back scattered and shattered, has bound again. Oh! I can't believe how much I want to see you every time. In the clear skies, and also in the mists, I am seeing the parallel world where only "we" exist. I beheld the charm in your eyes— still the same, like that persisting moon. My heart towards you has started beating in the same tune. I don't know about the next chapter of our story, but I definitely know the oneness of this glory. I want to unfold my words now to you, to be there in this tune with me. Yes, I want you also to dwell in this song of love with me.                                                   ...